संस्था द्वारा '' बाल संस्कार '' यानि की ; आश्रय गृह गृह कैसा भी हो पर हो अपना यहॉं पर उसे किसी भी प्रकार की कोई चिंता ना हो तथा पूर्णत्या वह उसमें सुरक्षित हो ऐसा ही एक गृह संस्था द्वारा इन बच्चों को उपलब्ध करवाया गया है इस कार्यक्रम के अन्तर्गत 18 वर्ष तक के वह बालक जो घर से भाग कर आये हो, कचरा चुगने वाले,घरो में काम करने वाले,बूट पालिस करने वाले, घरो से अत्याचार से परेषान बालक जो कि बाल कल्याण समिति के माध्यम से अस्थाई प्रवेष दिया जाता है इन बच्चो को निःशुल्क आवास, भोजन, शिक्षा, मनोरंजन, वस्त्र, शिक्षण प्रशिक्षण इत्यादि की व्यवस्था की गई संस्था का यह लगातार प्रयास है कि इन बच्चों को इस प्रकार से शिक्षित किया जाए कि उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े उन्हें व्यवसायिक प्रशिक्षण देकर स्वरोजगारमुखी करने की तरफ विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि आगे चलकर यह बच्चे अपने पैरो पर खड़े हो सके तथा समाज की मुख्य धारा में शामिल होकर देश के विकास में भागीदार बन सके । संस्था द्वारा इस प्रकार के 12 बच्चों को लाभान्वित किया गया है ।
